यमुना इंटरनेशनल एयरपोर्ट प्राइवेट लिमिटेड (वाई.आई.ए.पी.एल.) को नोएडा के मास्टरप्लान के लिए अंतिम मंज़ूरी मिल गई है।

यमुना इंटरनेशनल एयरपोर्ट प्राइवेट लिमिटेड को मास्टरप्लान पर अंतिम मंज़ूरी मिली
दिल्ली, 31 अगस्त 2021
यमुना इंटरनेशनल एयरपोर्ट प्राइवेट लिमिटेड (वाई.आई.ए.पी.एल.) ने नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (एन.आई.ए.) के मास्टरप्लान के लिए अंतिम मंजूरी प्राप्त कर ली है। यह मास्टरप्लान एविएशन कंसल्टेंट्स लैंड्रम एंड ब्राउन और ज्यूरिख एयरपोर्ट इंटरनेशनल के विशेषज्ञों के साथ निकट सहयोग में तैयार किया गया था। यह मंजूरी एन.आई.ए.एल., डी.जी.सी.ए., ए.ए.आई., बी.सी.ए.एस. और आवश्यक पर्यावरणीय प्राधिकरणों से प्राप्त हुई है। मास्टरप्लान रियायत समझौते की आवश्यकताओं और आई.सी.ए.ओ., डी.जी.सी.ए., ए.ए.आई. और बी.सी.ए.एस. के लागू नियमों के अनुरूप है।
यह मास्टरप्लान, वित्तीय वर्ष 2024–25 में शुरू होने की अपेक्षा के साथ, एन.आई.ए. के विकास की रणनीतिक दिशा को परिभाषित करता है और 40–वर्षीय रियायत अवधि के अंत तक का रोडमैप प्रस्तुत करता है।
श्री क्रिस्टोफ श्नेलेमन, मुख्य कार्यकारी अधिकारी, यमुना इंटरनेशनल एयरपोर्ट प्राइवेट लिमिटेड ने कहा, "मास्टरप्लान की मंजूरी एक प्रमुख पड़ाव है, क्योंकि यह नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के अगले 40 वर्षों के विकास का मार्ग प्रशस्त करती है। यह मास्टरप्लान हमारे लक्ष्यों और उद्देश्यों को दर्शाता है, जो वित्तीय रूप से विवेकपूर्ण, लागत-कुशल और व्यावसायिक रूप से सक्षम समाधान प्रदान करता है; इसकी मूल भावना में यात्री सुविधा ही है। हम प्रसन्न हैं कि कोविड–19 की सीमाओं के बावजूद हमने निर्धारित समय सीमा के भीतर मास्टरप्लानिंग प्रक्रिया को पूरा किया। हम भारत के लोगों के लिए एक विश्व–स्तरीय हवाईअड्डा विकसित करने की दिशा में अग्रसर हैं, जो भारतीय आतिथ्य और स्विस दक्षता का मेल होगा।"
पहला एन.आई.ए. मास्टरप्लान एयरपोर्ट साइट पर विभिन्न रणनीतिक स्थानों पर विभिन्न विकास संभावनाओं की नींव रखता है और नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट को एक गंतव्य के रूप में लॉन्च करता है। यह हवाई यात्रा, हाई-स्पीड रेल, मेट्रो और सड़क परिवहन का संगम होगा। मास्टरप्लान 2 रनवे के साथ 40–वर्षीय अवधि की मांग को पूरा करने के लिए तैयार किया गया है, हालांकि उत्तर प्रदेश सरकार की दीर्घकालिक योजना 5 रनवे विकसित करने की है। यह मास्टरप्लान इस महत्वाकांक्षी विकास के लिए आधार प्रदान करता है।
मास्टरप्लान का विकास 4 चरणों में किया जाएगा और इसमें निम्नलिखित प्रमुख विशेषताएं शामिल हैं:
| चरण | चरण I | चरण IV |
| यात्री क्षमता | 12 मिलियन यात्री प्रति वर्ष | 70 मिलियन यात्री प्रति वर्ष |
| एयर ट्रैफिक मूवमेंट | 96,400 प्रति वर्ष | 489,700 प्रति वर्ष |
| कार्गो (टन) | 249,600 | 1,129,400 |
| कार्गो और लॉजिस्टिक्स (वर्ग मीटर) | 79,700 | 407,000 |
| रनवे | नॉर्थ रनवे 3900 मीटर | नॉर्थ और साउथ रनवे क्रमशः 3900 मीटर और 4150 मीटर |
| एयरक्राफ्ट स्टैंड | 28 स्टैंड | 186 स्टैंड |
| यात्री टर्मिनल भवन | टर्मिनल T1 101,590 वर्ग मीटर | टर्मिनल T1 और T2 कुल 488,000 वर्ग मीटर |
| फ्यूल फार्म | 3 x 3300 घन मीटर | 8 x 6000 घन मीटर |
| 37,000 वर्ग मीटर | 56,000 वर्ग मीटर | |
| जनरल एविएशन | 100,400 वर्ग मीटर | 180,700 वर्ग मीटर |
| मेंटेनेंस, रिपेयर एंड ओवरहाल | 40 एकड़ | |
| रियल एस्टेट विकास | 167 एकड़ | |
दो टर्मिनल कॉम्प्लेक्स
एयरपोर्ट के पूरा होने पर इसमें दो यात्री टर्मिनल होंगे। टर्मिनल 1 की क्षमता 30 मिलियन यात्री प्रतिवर्ष होगी और टर्मिनल 2 की क्षमता 40 मिलियन यात्री प्रतिवर्ष। दोनों टर्मिनल आपस में जुड़े होंगे ताकि यात्रियों के लिए स्थानांतरण सुविधाजनक हो, पैदल दूरी कम हो और पर्यावरणीय प्रभाव घटे। मॉड्यूलर विकास योजना से निर्माण के दौरान संचालन पर प्रभाव न्यूनतम रहेगा। इंटरटर्मिनल कनेक्टर एयरलाइनों के लिए लचीलापन सुनिश्चित करेगा।
पहला टर्मिनल (टी.1) दो चरणों में बनेगा– पहले चरण में 12 मिलियन यात्रियों की क्षमता और दूसरे चरण में अतिरिक्त 18 मिलियन यात्रियों की क्षमता। टर्मिनल 2 भी दो चरणों में बनेगा– पहले चरण में 12 मिलियन और दूसरे में 18 मिलियन की क्षमता होगी। दोनों टर्मिनलों के सामने ग्राउंड ट्रांसपोर्टेशन सेंटर तक सीधी पहुंच होगी।
