लाइमस्टोन कैल्साइंड क्ले सीमेंट से निर्माण करने वाला देश का पहला बड़े पैमाने का प्रोजेक्ट बना नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट

लाइमस्टोन कैल्साइंड क्ले सीमेंट से निर्माण करने वाला देश का पहला बड़े पैमाने का प्रोजेक्ट बना नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट
नई दिल्ली, 26 सितंबर 2025:
नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (एन.आई.ए.), जो ज्यूरिख एयरपोर्ट इंटरनेशनल एजी की सहायक कंपनी है, भारत की सतत अवसंरचना यात्रा में एक नया मानक स्थापित करते हुए लाइमस्टोन कैल्साइंड क्ले सीमेंट (एल.सी.3) को अपनाने वाला देश का पहला बड़े पैमाने का प्रोजेक्ट बन गया है। यह कम-कार्बन निर्माण सामग्री के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है, जिसके माध्यम से एन.आई.ए. भारत की पहली बड़ी अवसंरचना परियोजना बन गया है जिसने अपने निर्माण में एल.सी.3 को सम्मिलित किया है।
इस महत्वपूर्ण उपलब्धि का आयोजन एयरपोर्ट साइट पर किया गया, जिसमें भारत में स्विट्ज़रलैंड दूतावास के प्रतिनिधियों और भारत के सीमेंट उद्योग के वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति रही। यह अवसर पर्यावरणीय जिम्मेदारी के प्रति साझा प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
एल.सी.3 एक क्रांतिकारी, कम-कार्बन सीमेंट है, जिसे एक दशक लंबी (2013–2023) अंतरराष्ट्रीय साझेदारी के माध्यम से विकसित किया गया है। इस सहयोग में भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आई.आई.टी.) दिल्ली और मद्रास, स्विस डेवलपमेंट कोऑपरेशन (एस.डी.सी.), इकोल पॉलीटेक्निक फेडरल डी लॉज़ान (ई.पी.एफ.एल. – स्विट्ज़रलैंड), टेक्नोलॉजी एंड एक्शन फॉर रूरल एडवांसमेंट (टारा) और क्यूबा की यूनिवर्सिदाद दे लास विल्लास (यू.सी.एल.वी.) शामिल हैं। इसका परिणाम भवन निर्माण सामग्री उद्योग के लिए एक नवोन्मेषी उत्पाद के रूप में सामने आया है, जिसके प्रमुख लाभ निम्नलिखित हैं:
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कम कार्बन उत्सर्जन: पारंपरिक पोर्टलैंड सीमेंट की तुलना में 40% तक कम CO₂ उत्सर्जन
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लागत प्रभावी: उत्पादन में लगभग 25% अधिक किफायती
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संसाधन दक्ष: प्रचुर मात्रा में उपलब्ध निम्न-ग्रेड चूना पत्थर और मिट्टी का उपयोग
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ऊर्जा दक्ष: 1450°C के बजाय केवल 800°C पर कैल्सिनेशन की आवश्यकता
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उत्कृष्ट प्रदर्शन: पारंपरिक सीमेंट के समान या उससे बेहतर गुण
यह पहल भारत के निजी क्षेत्र द्वारा संचालित है, जिसमें जेके सीमेंट, जेके लक्ष्मी सीमेंट, अल्ट्राटेक सीमेंट, डालमिया भारत सीमेंट और श्री सीमेंट जैसी प्रमुख कंपनियों ने एल.सी.3 के व्यावसायिक उत्पादन की घोषणा की है। इससे दुनिया के दूसरे सबसे बड़े सीमेंट बाजार में स्वच्छ और सतत विकास का मार्ग प्रशस्त हुआ है।
नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के चीफ डेवलपमेंट ऑफिसर, निकोलस शेंक ने कहा,
“नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट में हम सततता को केंद्र में रखते हुए एक विश्व-स्तरीय सुविधा विकसित करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। भारत में एल.सी.3 से निर्माण करने वाला पहला बड़े पैमाने का प्रोजेक्ट बनने पर हमें गर्व है। इस अभिनव सीमेंट का उपयोग यह दर्शाता है कि कैसे प्रमुख अवसंरचना परियोजनाएं परिवर्तन का नेतृत्व कर सकती हैं और देश में निर्माण के भविष्य के लिए एक नया मानक स्थापित कर सकती हैं।”
भारत और भूटान में स्विट्ज़रलैंड दूतावास में अंतरराष्ट्रीय सहयोग प्रमुख, फिलिप सास ने कहा,
“स्विस-भारतीय पर्यावरणीय सहयोग के अंतर्गत एल.सी.3 का विकास स्विट्ज़रलैंड, भारत और क्यूबा के वैज्ञानिकों एवं विशेषज्ञों के बीच सहयोग की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। एल.सी.3 निर्माण क्षेत्र में एक क्रांतिकारी समाधान है, जिसका प्रभाव व्यापक है। यह भारत और अन्य वैश्विक क्षेत्रों में इसके व्यावसायिक उत्पादन और बड़े पैमाने पर उपयोग का मार्ग प्रशस्त करता है। भारत में स्विट्ज़रलैंड दूतावास सतत भवन निर्माण और अवसंरचना क्षेत्र पर विशेष ध्यान देते हुए, सततता और लचीलापन बढ़ाने के लिए पूर्णतः प्रतिबद्ध है।”
नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के बारे में
नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (आईएटीए कोड – डी. एक्स. एन.) ग्रेटर दिल्ली क्षेत्र और पश्चिमी उत्तर प्रदेश को भारत और विश्व के अन्य शहरों से जोड़ेगा। यह विश्व-स्तरीय एयरपोर्ट स्विस दक्षता और भारतीय आतिथ्य का संयोजन प्रस्तुत करेगा, जिससे यात्रियों को समृद्ध अनुभवों के साथ व्यापक वाणिज्यिक आकर्षण और सेवाएं उपलब्ध होंगी। एन.आई.ए. सतत डिजाइन और संचालन सिद्धांतों द्वारा समर्थित शून्य-कार्बन उत्सर्जन के महत्वाकांक्षी लक्ष्य के प्रति प्रतिबद्ध है।
यमुना इंटरनेशनल एयरपोर्ट प्राइवेट लिमिटेड (वाई. आई. ए. पी. एल.) की स्थापना नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट ग्रीनफील्ड परियोजना के विकास, निर्माण और संचालन के लिए की गई थी। यह कंपनी ज्यूरिख एयरपोर्ट इंटरनेशनल एजी की 100% सहायक कंपनी है और उत्तर प्रदेश सरकार तथा भारत सरकार के साथ निकट सहयोग में सार्वजनिक-निजी भागीदारी परियोजना के कार्यान्वयन के लिए उत्तरदायी है। नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट की रियायत अवधि 01 अक्टूबर 2021 से प्रारंभ हुई है और यह 40 वर्षों तक चलेगी। उद्घाटन के समय एयरपोर्ट में एक रनवे और एक टर्मिनल होगा, जिसकी वार्षिक क्षमता 1.2 करोड़ यात्रियों की होगी, तथा भविष्य में अतिरिक्त चरणों में विस्तार की संभावना रहेगी।
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